बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग कब और कैसे दें? | Bacho Ko Potty Training Kaise De

Bacho Ko Potty Training Kaise De
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किसी भी बच्चे की परवरिश मां-बाप के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और संतुलित दिनचर्या का पालन करने के लिए उन्हें कई बातें सिखाना जरूरी होता है। ऐसी ही एक सीख पॉटी ट्रेनिंग भी है। अक्सर मां-बाप पॉटी ट्रेनिंग देने के लिए किसी केयरटेकर का सहारा लेते हैं, जबकि खुद के द्वारा भी पॉटी ट्रेनिंग देना आसान है। मॉमजंक्शन के इस लेख में बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग देने के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी। लेख में बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग देने के लिए जरूरी सामान और पॉटी ट्रेनिंग के लिए की जाने वाली तैयारी के बारे में भी बताया जा रहा है।

सबसे पहले यह जान लीजिए कि पॉटी ट्रेनिंग देने का मतलब क्या होता है।

बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग (शौच प्रशिक्षण) देने का क्या मतलब है? | Bacho Ko Potty Training

बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग या टॉयलेट ट्रेनिंग देने का मतलब उन्हें शरीर से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ जैसे मल-मूत्र आदि के संकेतों को समझना है। साथ ही यह सारी प्रक्रिया सही समय पर उचित तरीके से करना भी जरूरी है। अन्य शब्दों में टॉयलेट या पॉटी ट्रेनिंग बच्चों को मूत्राशय और बाउल कंट्रोल (Bowel Control) सिखाने की प्रक्रिया है। साथ ही उन्हें यह समझाना है कि टॉयलट सीट का प्रयोग कैसे किया जाता है (1) (2)

आइए, अब जानते हैं कि आप अपने बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग देना कब शुरू कर सकते हैं।

मुझे अपने बच्चे की पॉटी ट्रेनिंग कब शुरू करनी चाहिए?

पॉटी ट्रेनिंग के लिए सही समय के बारे में जानना जरूरी है। पॉटी ट्रेनिंग के लिए बच्चे लगभग 18 महीने से 24 महीने के बीच तैयार हो सकते हैं। इस उम्र में होने के बाद वो खुद भी संकेत दे सकते हैं कि उनके डाइपर को बदलने की आवश्यकता है। इसलिए, आप अपने बच्चे की पॉटी ट्रेनिंग 1.8 वर्ष से 2 साल के बीच शुरू कर सकते हैं (3)

लेख के इस भाग में आपको बताया जाएगा कि आपका शिशु पॉटी ट्रेनिंग के लिए तैयार है या नहीं।

मुझे कैसे पता चलेगा की मेरा शिशु पॉटी ट्रैनिंग के लिए तैयार है?

इन निम्नलिखत प्रक्रिया के आधार पर कहा जा सकता है कि आपका शिशु पॉटी ट्रेनिंग के लिए तैयार है (4) :

  • जब आपका बच्चा बैठने व चलन शुरू कर दे।
  • अगर वह आपके छोटे-छोटे निर्देशों को समझना शुरू कर दे।
  • अपने आप कुछ चीजें करने में सक्षम होने लगे।
  • किसी काम को अच्छे और सही से करने की तारीफ सुनना पसंद करता हो।
  • परिवार के अन्य सदस्यों के व्यवहार की नकल करना शुरू कर दे।

आइए, अब जानते हैं कि शिशु को पॉटी ट्रेनिंग के लिए तैयार करते समय किन-किन चीजों की जरूरत होती है।

शिशु की पॉटी ट्रेनिंग के लिए किन चीजों की जरूरत होगी?

  • पॉटी सीट – पॉटी करने वाली सीट।
  • पॉटी चेयर – पॉटी करने वाली कुर्सी।
  • ग्लव्स – बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग देते समय खुद ग्लव्स पहन कर रखें, ताकि बच्चे संक्रमण से बचें रहें।
  • टॉयलेट सॉप – पॉटी करने के बाद बच्चों को हाथ धुलवाने की आदत डालें।
  • टॉयलेट पेपर – पॉटी करने के बाद हाथ से पानी साफ करने के लिए बच्चों को टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल करने का तरीका समझाएं।
  • ट्रेनिंग पैन्ट्स – यह ट्रेनिंग के दौरान अचानक होने वाली पॉटी को फैलने से रोकने में मदद कर सकती हैं। यह पॉटी को सोखने के लिए विशेष रूप से तैयार की जाने वाली पैन्ट्स होती हैं।
  • टॉयलेट टारगेट साइन – इससे बच्चों को यह समझने में आसानी होती है कि उन्हें पॉटी करने के लिए कौन से स्थान पर जाना है।
  • स्टेप स्टूल – पॉटी सीट पर बैठने के लिए स्टेप स्टूल की जरूरत पड़ सकती है।
  • अंडर वियर – पॉटी करने के बाद बच्चे को अंडरवियर पहनाना जरूरी होता है।
  • फॉसट एक्सटेंडर – बाथरूम में लगे नल (Tap) से आसानी से पानी निकालने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

नोट : इसके अतिरिक्त पॉटी ट्रेनिंग के लिए जरूरत की चीजों की जानकारी हेतु एक बार बाल रोग विशेषज्ञ से स लाह ले सकते हैं।

आइए, अब जानते हैं कि पॉटी ट्रेनिंग देने के लिए क्या तैयारी की जा सकती है।

पॉटी प्रशिक्षण के लिए क्या तैयारी करें?

पॉटी प्रशिक्षण के लिए निम्न तैयारियां की जा सकती हैं (5):

  • अगर आपके घर में एक से ज्यादा बाथरूम हैं, तो आपको एक से ज्यादा पॉटी सीट की जरूरत पड़ सकती है।
  • पॉटी चेयर को अपने बच्चे के खेलने के स्थान के पास रखें, ताकि वो उसे देख सकें।
  • दिन का एक शेड्यूल बनाएं और दिन में एक बार, पूरी तरह से कपड़े पहने हुए बच्चे को पॉटी शीट पर बैठाएं।
  • उन्हें कभी भी इस पर बैठने के लिए मजबूर न करें और जब बच्चा उस पर से उतरना चाहे, तो उसे उतरने दें।
  • जब वह आराम से पॉटी कुर्सी पर बैठना शुरू कर दें, तब उसे बिना डायपर या पैंट के इस पर बैठने दें।
  • उन्हें यह समझाएं कि पॉटी जाने से पहले पैंट को कैसे उतरना है।
  • अपने बच्चे को यह जानने में मदद करें कि “पूप” और “पीप” जैसे सरल शब्दों का उपयोग करके बाथरूम के बारे में कैसे बताना है।

आइए, अब जानते हैं कि बच्चों को टॉयलेट ट्रेनिंग कैसे दी जा सकती है।

बच्चे को कैसे दें टॉयलेट ट्रेनिंग?

इस ट्रेनिंग में प्रारंभिक रूप से बच्चों को टॉयलेटिंग शब्दों के बारे में बताएं। बच्चे के सामने बार-बार टॉयलेट जैसे समान शब्द बोलने का प्रयास करें (6)। एक बात का ध्यान रखें कि बच्चे एक या दो दिन में इस पूरी प्रक्रिया को नहीं सीख सकता है। उसे यह सब सीखने के लिए समय देना चाहिए। इसलिए, बच्चों को निम्न प्रकार से टॉयलेट ट्रेनिंग दी जा सकती है (5) :

  • सबसे पहले उनके डायपर से स्टूल (मल) निकालकर, उनके सामने पॉटी चेयर में डालें। इससे उन्हें यह समझ आ सकता है कि उन्हें मल त्याग कहां करना है।
  • उन्हें अपने बड़े भाई-बहन से सीखने दें कि वो कैसे पॉटी करते हैं।
  • जब आप पॉटी चेयर के जरिए स्टूल को टॉयलेट में ट्रांसफर करते हैं, तो उन्हें देखने दें।
  • उनके सामने टॉयलेट में फ्लश करें और फिर बाद में उन्हें देखें कि वो फ्लश करते हैं या नहीं।
  • जब आपका बच्चा संकेत दे कि उन्हें शौचालय का उपयोग करने की आवश्यकता है, तो सतर्क रहें। अपने बच्चे को जल्दी से टॉयलेट ले जाएं।
  • बच्चे की पॉटी करने से पहले पैंट नीचे करना सिखाएं।
  • फिर उनके टॉयलट सीट पर सही तरीके से बैठकर लेकर पॉटी करने तक उनके साथ रहें।
  • अपने बच्चे को यह सिखाएं कि वह क्या गलत कर रहे हैं और ऐसा करने से उन्हें रोकें।
  • जब वो पॉटी सीट पर बैठे हों, तो उनके साथ रहें।
  • अपने बच्चे को स्टूल (मल) करने के बाद खुद से पोंछना/साफ करना सिखाएं। लड़कियों को स्टूल के बाद साफ करने की प्रक्रिया आगे से पीछे की ओर सिखाएं। इससे योनि वाले हिस्से से गंदगी दूर रहेगी।
  • हर बार ध्यान दें कि आपका बच्चा शौच का उपयोग करने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से धोए।
  • अपने बच्चे की हर बार तारीफ करें कि वे टॉयलेट जाते हैं, भले ही वो वहां जाकर केवल बैठे रहते हों।
  • याद रखें कि आपका मुख्य उद्देश्य उन्हें टॉयलेट जाने और इसका उपयोग करने के साथ-साथ बाथरूम जाने की जरूरत को समझाना है।
  • उन्हें जोर देकर या डांट कर पॉटी करने के लिए न बोलें।
  • उन्हें ढीले कपड़े पहनाएं, ताकि पॉटी करवाने से पहले उन्हें जल्दी से और आसानी से उतारा जा सके।
  • इस तरह आपका बच्चा बिना किसी की मदद के पॉटी के लिए टॉयलट का इस्तेमाल कर सकता है।

आइए, अब जानते हैं कि बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग देने के फायदे क्या हो सकते हैं।

बच्चे को पॉटी ट्रेनिंग देने के फायदे

वैसे तो बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग देने का सामान्य फायदा तो यही है कि वह पॉटी करने के लिए सही समय पर सही जगह जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त निम्न फायदे देखने को मिल सकते हैं (7)

  • देखभाल करने वाले केयरटेकर को कम तनाव का सामना करना पड़ेगा।
  • देखभाल करने वाला व्यक्ति कम समय और कम प्रयास में ही बच्चे की साफ-सफाई कर सकता है।
  • स्वच्छता से जुड़े सामान जैसे डायपर आदि का खर्चा कम होगा।
  • इससे त्वचा की संवेदनशीलता और जलन कम हो सकती है।
  • बच्चे के मां-बाप इस बात से निश्चिंत महसूस करेंगे।
  • मां-बाप किसी भी सामाजिक कार्य में शामिल हो सकते हैं।
  • पॉटी ट्रेनिंग देने से बच्चों में स्टूल के कारण होने वाले संक्रमण से भी बचाने में मदद मिल सकती है।
  • बच्चे के अच्छे विकास के लिए भी टॉयलेट ट्रेनिंग देने के फायदे हो सकते हैं (8)

इसके अतिरिक्त अन्य कई मानसिक फायदों को लेकर वैज्ञानिक शोध अभी भी जारी है।

लेख के इस भाग में आपको पॉटी ट्रेनिंग के नुकसान के बारे में बताया जा रहा है।

क्या बच्चे को पॉटी ट्रेनिंग देने के कुछ नुकसान भी हैं?

हां, अगर गलत तरीके से पॉटी ट्रेनिंग दी जाएगी] तो इसके निम्नलिखित दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं ;

  • टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान बच्चों को सीखने के लिए ज्यादा जोर देना उनमें नकारात्मक और भावनात्मक दुष्प्रभावों को उत्पन्न कर सकता है (9)
  • पॉटी के बाद सफाई करते वक्त बच्चों को एनस में जलन हो सकती है (10)

नोट – इन नुकसानों से बचने के लिए एक बार शिशु विशेषज्ञ की सलाह लेना भी जरूरी है।

बच्चों की पॉटी ट्रेनिंग के संबंध में जानकारी के लिए पढ़ते रहें यह आर्टिकल।

पॉटी ट्रेनिंग देते समय मुझे क्या ध्यान रखना चाहिए?

पॉटी ट्रेनिंग देते समय निम्न बातों पर ध्यान देना जरूरी है:

  • पॉटी ट्रेनिंग देते समय हो सकता है कि बच्चे कपड़ों में ही स्टूल कर दें। ऐसी स्थिति में बिल्कुल शांत रहें और स्टूल को बिना किसी चिड़चिड़ाहट के साफ करें (1)। अगली बार के लिए बच्चे को बताएं कि उन्हें सही समय पर टॉयलेट जाना है।
  • अपने बच्चे से समय-समय पर टॉयलेट जाने के बारे में पूछते रहें। ज्यादातर बच्चे एक घंटे में या फिर कुछ खाने के बाद या ज्यादा तरल पदार्थ पीने के बाद टॉयलेट जा सकते हैं। ऐसा करने से पॉटी ट्रेनिंग के दौरान एक्सीडेंट्स (पैंट में मल करना) से बचने में मदद मिल सकती है।
  • बच्चों को अगर बार-बार एक्सीडेंट्स की समस्या हो रही है, तो उन्हें मल सोखने में सक्षम अंडरवियर पहनाएं।
  • पॉटी ट्रेनिंग देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बच्चे को इसे सीखने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है (10)। अगर सही तरीके से पॉटी ट्रेनिंग देने के बाद भी उसे सीखने में समस्या आ रही है, तो कुछ समय बाद फिर से ट्रेनिंग शुरू की जा सकती है।
  • पॉटी ट्रेनिंग देते समय ध्यान रहे कि बच्चों के साथ बहुत अच्छा व्यवहार करें, उन्हें ऐसा करने के लिए उन पर दबाव न डालें।
  • बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग देने के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार से सजा न दें। यह उन्हें नकारात्मक रूप से परेशान कर सकता है।
  • बाथरूम को बच्चों के हिसाब से अच्छा और खूबसूरत बना कर रखें, ताकि बच्चे घर के अलावा, इस हिस्से में भी अच्छा महसूस कर सकें।
  • उस दौरान किसी अन्य प्रकार की रुकावट जैसे शोर, किसी का आना, सिब्लिंग्स का परेशान करना आदि को दूर रखें, इससे बच्चों का ध्यान बंट सकता है, जिससे वह ज्यादा देर तक पॉटी में नहीं बैठेंगे और बाहर जाने की जिद भी कर सकते हैं।
  • इसके अतिरिक्त बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग देने के तरीकों को अच्छी तरह से समझ लें और फिर उसी हिसाब से उन्हें सही पॉटी ट्रेनिंग दें।

इस लेख में आपने जाना कि बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग देना कितना जरूरी है। साथ ही यह बताया गया कि इस दौरान आपको किन बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि, यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है, इसलिए बच्चों को बहुत प्यार से ट्रेनिंग दें। उन्हें जल्दी सबकुछ सिखाने की कोशिश बिल्कुल भी न करें। उन्हें इसे सीखने के लिए पर्याप्त समय लेने दें। अगर आप पॉटी ट्रेनिंग के संबंध में कुछ और जानना चाहते हैं, तो अपने सवाल नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिखकर हमें भेज सकते हैं। हम वैज्ञानिक प्रमाण सहित जवाब देने का प्रयास करेंगे।

संदर्भ (References) :

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